Karnaal

  जून में हमलोग करनाल गए। कविता का सामान पहुंचाना था। पंकज भी ship से आए थे। पंकज के साथ कविता को लंदन जाना था। तो मिलना जुलना भी था। सो हमलोग करनाल पहुंच गए। जून का महीना था।बहुत ही ज्यादा गर्मी थी। स्टेशन पर पंकज और कविता लेने आए थे। दोनों जन की खुश देख कर मन बहुत प्रसन्न हुआ।पंकज हमलोगों के लिए एकदम ठंडा पानी और ज्यूस ले कर आए थे। उसको पीते ही थोड़ी राहत हुई।दो दिन रुके। तीसरे दिन मुंबई के लिए निकालना था। कविता को दिल्ली असेंबली से वीज़ा लेना था।हमलोग सुबह ही दिल्ली के निकल गए। असेंबली से वीज़ा लिए लंच कर के लोटस टेंपल देखने गए।बहुत अधिक गर्मी थी।पंकज और कविता वापस करनाल के लिए 

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